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Diet In Arthritis: गठिया के रोगियों को कà¥à¤¯à¤¾ खाना चाहिठऔर कà¥à¤¯à¤¾ नहीं, यहां जानें पूरी बात
गठिया (Arthritis) à¤à¤• à¤à¤¸à¥€ समसà¥à¤¯à¤¾ है, जो इंसान को चलने-फिरने में à¤à¥€ लाचार कर देती है। यहां जानें, कà¥à¤¯à¤¾ खाकर आप इस दरà¥à¤¦ पर कंटà¥à¤°à¥‹à¤² कर सकते हैं...
गठिया à¤à¤• तरह की सूजन का रोग है। यह सूजन पà¥à¤°à¤à¤¾à¤µà¤¿à¤¤ वà¥à¤¯à¤•à¥à¤¤à¤¿ के शरीर के किसी à¤à¤• जोड़ में या कई जोड़ों में à¤à¤• साथ हो सकती है। इसके वà¥à¤¯à¤•à¥à¤¤à¤¿ को जोड़ों में तेज दरà¥à¤¦, चलने और उठने-बैठने में दिकà¥à¤•त होती है। यदि आपको या आपके परिवार में किसी को इस तरह की समसà¥à¤¯à¤¾ है तो आप खान-पान का धà¥à¤¯à¤¾à¤¨ रखते हà¥à¤ गठिया (Arthritis) के कारण होनेवाले दरà¥à¤¦ और पीड़ा को काफी हद तक नियंतà¥à¤°à¤¿à¤¤ किया जा सकता है.
बथà¥à¤ का सेवन करें
-जिन लोगों को गठिया की समसà¥à¤¯à¤¾ हो, उनà¥à¤¹à¥‡à¤‚ बथà¥à¤ का सेवन जरूर करना चाहिà¤à¥¤ हालांकि पà¥à¤°à¤¾à¤•ृतिक रूप से बथà¥à¤† सिरà¥à¤« सरà¥à¤¦à¤¿à¤¯à¥‹à¤‚ में उपलबà¥à¤§ होता है और ऑफ सीजन में आपको इसका सेवन नहीं करना चाहिà¤à¥¤
-लेकिन सरà¥à¤¦à¥€ के सीजन में जितने समय à¤à¥€ बथà¥à¤† उपलबà¥à¤§ हो आपको इसका सेवन जरूर करना चाहिà¤à¥¤ कà¥à¤¯à¥‹à¤‚कि बथà¥à¤† गठिया के रोगियों के लिठकिसी औषधि की तरह काम करता है। इसके साथ ही आप बथà¥à¤ के जूस का सेवन नियमित रूप से कर सकते हैं। इसके लिठहर दिन सà¥à¤¬à¤¹ खाली पेट बथà¥à¤ का जूस पिà¤à¤‚।
हर दिन सेब खाà¤à¤‚
-अंगà¥à¤°à¥‡à¤œà¥€ की पà¥à¤°à¤¾à¤¨à¥€ कहावत है कि हर दिन à¤à¤• सेब खाने से आप डॉकà¥à¤Ÿà¤°à¥à¤¸ से दूर रह सकते हैं। लेकिन ये सेब ऑरà¥à¤—ेनिक हों, तà¤à¥€ यह कहावत फिट बैठती है। इसलिठआप हर दिन à¤à¤• सेब जरूर खाà¤à¤‚। लेकिन इस सेब को छीलकर खाà¤à¤‚। ताकि इसके छिलके को हटाकर इसमें हानिकारक रसायनों के पà¥à¤°à¤à¤¾à¤µ को कम किया जा सके।
रोज 3 लीटर पानी पिà¤à¤‚
-गठिया के रोगियों को अपनी अतिरिकà¥à¤¤ देखà¤à¤¾à¤² की आवशà¥à¤¯à¤•ता होती है। यदि आप सामानà¥à¤¯ दिनों में पानी पीने को लेकर लापरवाही करते रहे हैं तो अब इसे पूरी तरह बंद कर दीजिà¤à¥¤ हर दिन कम से कम तीन लीटर तरल पदारà¥à¤¥ का सेवन करें। इसमें सादा पानी, नींबू पानी, जूस, शरबत आदि को शामिल कर सकते हैं।
अलसी के बीज खाà¤à¤‚
-हर दिन अलसी के बीच चबाकर खाने से आपको यूरिक à¤à¤¸à¤¿à¤¡ नियंतà¥à¤°à¤¿à¤¤ करने में सहायता मिलेगी। आप हर दिन à¤à¤• छोटा चमà¥à¤®à¤š अलसी के बीजों का सेवन कर सकते हैं। ये बीज आप खाना खाने के बाद, नाशà¥à¤¤à¥‡ और खाने के बीच के समय में à¤à¥€ खा सकते हैं।
विटमिन-सी का सेवन
-गठिया के रोगियों को विटमिन-सी यà¥à¤•à¥à¤¤ à¤à¥‹à¤œà¥à¤¯ पदारà¥à¤¥à¥‹à¤‚ का सेवन करना चाहिà¤à¥¤ जैसे संतरा, मौसमी, नींबू, अनानास, कीवी और बेरीज। लेकिन इस सà¤à¥€ का सेवन दोपहर के समय करना चाहिà¤à¥¤ सà¥à¤¬à¤¹ या शाम के समय इनके सेवन से आपको दरà¥à¤¦ की समसà¥à¤¯à¤¾ अधिक हो सकती है।
बहà¥à¤¤ ठंडा खाने से बचें
-गठिया के रोगियों को à¤à¤¸à¥€ चीजें खाने से बचना चाहिठजो अहसास में ठंडी होती हैं या जिनकी तासीर ठंडी होती है। जैसे, पà¥à¤¯à¥‹à¤° मूंग की दाल, खटà¥à¤Ÿà¥€ या फà¥à¤°à¤¿à¤œ में रखी हà¥à¤ˆ दही, खटà¥à¤Ÿà¥€ और ठंडी छाछ। इसके साथ ही आइसकà¥à¤°à¥€à¤®, कà¥à¤²à¥à¤«à¥€ और बरà¥à¤« से तैयार चीजों का कम से कम सेवन करें।
अधिक पà¥à¤°à¥‹à¤Ÿà¥€à¤¨ से बचें
-गठिया के रोगियों को à¤à¤¸à¤¾ à¤à¥‹à¤œà¤¨ खाने से बचना चाहिठजिसमें पà¥à¤°à¥‹à¤Ÿà¥€à¤¨ की अधिकता हो।
-साथ ही गठिया के रोगियों को à¤à¤¸à¥€ चीजें à¤à¥€ अपने à¤à¥‹à¤œà¤¨ में शामिल नहीं करनी चाहिà¤, जो शरीर में वायॠबढ़ाने का काम करती हैं।
-जैसे, छोले, चना, राजमा, अरबी, कटहल, आदि ना खाà¤à¤‚। साथ ही घी या तेल में तलकर तैयार की गई खादà¥à¤¯ वसà¥à¤¤à¥à¤à¤‚ यानी डीप फà¥à¤°à¤¾à¤‡à¤¡ à¤à¥‹à¤œà¤¨ का सेवन ना करें।
-मैदा से बने बिसà¥à¤•िटà¥à¤¸, सà¥à¤¨à¥ˆà¤•à¥à¤¸ और चिपà¥à¤¸ वगैरह खाने से à¤à¥€ बचें। कà¥à¤¯à¥‹à¤‚कि मैदा फैट बढ़ाने और पेट में गैस बनाने का काम करती है। यह आपके दरà¥à¤¦ को बढ़ा सकती है।
मछली और अखरोठसे दूर रहें
-नॉनवेज लवरà¥à¤¸ के लिठमछली बहà¥à¤¤ पà¥à¤°à¤¿à¤¯ होती है कà¥à¤¯à¥‹à¤‚कि यह पोषक ततà¥à¤µà¥‹à¤‚ का खजाना à¤à¥€ होती है। वहीं, डà¥à¤°à¤¾à¤‡à¤«à¥à¤°à¥‚टà¥à¤¸ लवरà¥à¤¸ के लिठअखरोठसे दूर रखना आसान नहीं होता है। लेकिन आपको बता दें कि गठिया का रोग होने पर आपको इन दोनों से दूर रहना चाहिà¤à¥¤
-कà¥à¤¯à¥‹à¤‚कि अखरोठऔर मछली दोनों में ही ओमेगा-3 फैटी à¤à¤¸à¤¿à¤¡ पà¥à¤°à¤šà¥à¤° मातà¥à¤°à¤¾ में पाया जाता है। यह आपके शरीर में यूरिक à¤à¤¸à¤¿à¤¡ की मातà¥à¤°à¤¾ में वृदà¥à¤§à¤¿ करने का काम करेगा। इससे आपको इनà¥à¤¹à¥‡à¤‚ खाने का लाठकम और हानि जà¥à¤¯à¤¾à¤¦à¤¾ होगी। इसलिठइनसे बचना या बहà¥à¤¤ ही कम मातà¥à¤°à¤¾ में इनका सेवन कर सकते हैं।
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